September 28, 2021

Month: April 2021

अमीर खुसरो अपने दोसुखने और पहेलियों के लिए प्रसिद्ध थे। अकसर लोग रास्ता चलते उनसे  कुछ-न-कुछ सुनने के लिए उतावले रहते थे।  एक बार जब खुसरो कहीं जा रहे थे तो रास्ते में उन्हें प्यास लगी।  कुछ दूर एक कुएं पर चार पनिहारिनें पानी भर रही थीं। वह सीधे पनिहारिनों के पास पहुंचे और  उनसे पानी पिलाने के लिए कहने  लगे।  अमीर खुुसरो को देखते ही पनिहारिनों ने उन्हें पहचान लिया।  उन्होंने खुसरो के सामने शर्त रखी कि जब वह उनके कहे हुए शब्दों को जोड़ कर कुछ तुकबंदी  सुनाएंगे तब वे उन्हें पानी पिलाएंगी।  चारों पनिहारिनों ने एक-एक शब्द क्रमशः बोला - खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल।  खुसरो ने एक क्षण तक कुछ सोचा, फिर बोले - ‘‘खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चलाय।  आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजाय। ला पानी पिला।’’

अब्दुर्रहीम खानखाना अकबर के वरिष्ठ दरबारियों में से थे। वह अत्यंत उदार हृदय थे। वह स्वयं कवि होने के साथ-साथ अन्य कवियों का सम्मान तो करते ही थे, बल्कि मुक्त हस्त से उनकी सहायता भी करते रहते थे। उनकी दानशीलता और विनम्रता से प्रभावित होकर गंग कवि ने एक बार यह दोहा कहाµ ‘‘सीखे कहाँ नवाब जू, ऐसी दैनी दै न। ज्यों-ज्यों कर Åँचो कियो, त्यों-त्यों नीचे नैन।। रहीम ने बड़ी ही सरलता से दोहे में ही यह उत्तर दियाµ ‘‘देनहार कोउ और है देत रहत दिन-रैन। लोग भरम हम पै करैं, तासौं नीचे नैंन।।’’

बुलंदशहर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने विशेष समुदाय के तीन युवकों को छात्रा का अपहरण कर गैंगरेप और फिर हत्या करने के मामले...