September 28, 2021

रोचक प्रसंग

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय योगदान करने वाली सरोजनी नायडू एक अच्छी कवयित्री भी थीं। वह समसामयिक साहित्य और साहित्यत्यकारों के बारे...

अमीर खुसरो अपने दोसुखने और पहेलियों के लिए प्रसिद्ध थे। अकसर लोग रास्ता चलते उनसे  कुछ-न-कुछ सुनने के लिए उतावले रहते थे।  एक बार जब खुसरो कहीं जा रहे थे तो रास्ते में उन्हें प्यास लगी।  कुछ दूर एक कुएं पर चार पनिहारिनें पानी भर रही थीं। वह सीधे पनिहारिनों के पास पहुंचे और  उनसे पानी पिलाने के लिए कहने  लगे।  अमीर खुुसरो को देखते ही पनिहारिनों ने उन्हें पहचान लिया।  उन्होंने खुसरो के सामने शर्त रखी कि जब वह उनके कहे हुए शब्दों को जोड़ कर कुछ तुकबंदी  सुनाएंगे तब वे उन्हें पानी पिलाएंगी।  चारों पनिहारिनों ने एक-एक शब्द क्रमशः बोला - खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल।  खुसरो ने एक क्षण तक कुछ सोचा, फिर बोले - ‘‘खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चलाय।  आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजाय। ला पानी पिला।’’

अब्दुर्रहीम खानखाना अकबर के वरिष्ठ दरबारियों में से थे। वह अत्यंत उदार हृदय थे। वह स्वयं कवि होने के साथ-साथ अन्य कवियों का सम्मान तो करते ही थे, बल्कि मुक्त हस्त से उनकी सहायता भी करते रहते थे। उनकी दानशीलता और विनम्रता से प्रभावित होकर गंग कवि ने एक बार यह दोहा कहाµ ‘‘सीखे कहाँ नवाब जू, ऐसी दैनी दै न। ज्यों-ज्यों कर Åँचो कियो, त्यों-त्यों नीचे नैन।। रहीम ने बड़ी ही सरलता से दोहे में ही यह उत्तर दियाµ ‘‘देनहार कोउ और है देत रहत दिन-रैन। लोग भरम हम पै करैं, तासौं नीचे नैंन।।’’

सम्राट् अकबर अपने नवरत्नों से केवल धर्म या राजनीति पर ही नहीं, साहित्य पर भी अकसर चर्चा करते थे। एक दिन संगीत सम्राट् तानसेन ने कान्हरा राग में सूरदास का यह पद गाकर सुनाया- ‘‘जसुदा बार-बार यों भाखै। है कोउ ब्रज में हितू हमारो चलत गुपालहिं राखै।’’ अकबर ने इस पद का अर्थ जानना चाहा तो तानसेन ने बताया कि यशोदा बार-बार कहती हैं कि क्या ब्रज में हमारा कोई हितैषी नहीं है जो गोपाल को मथुरा जाने से रोक सके।  अबुल फजल फैजी तानसेन के विचारों से सहमत नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, ‘बार-बार’ का अर्थ है रोना। अर्थात यशोदा रो-रोकर यह कहती हैं...’’ बीच में ही बीरबल ने टोक दिया, ‘‘नहीं, ‘बार-बार’ का अर्थ है ‘द्वार-द्वार’। यशोदा द्वार-द्वार जा कर लोगों से कहती फिरती हैं।’’ दरबार में एक ज्योतिषी भी विराजमान था। उसने भी इस चर्चा में भाग लिया। उसने कहा, ‘‘बार का अर्थ ‘दिन’ होता है। तात्पर्य यह है कि यशोदा प्रतिदिन यह कहती रहती हैं...’’ अंत में रहीम ने कहा, ‘‘बार-बार का अर्थ ‘बाल’ है। यशोदा का बाल-बाल अर्थात् रोम-रोम यह कहता है।’’ ‘बार-बार’...