September 28, 2021

काव्य

इतिहास गवाह रहा है कि  'गोरे' अंग्रेजों के बनाए काले कानूनों का विरोध  करने वाला हर इनसान स्वयं को गर्व...

ईश्वर के नाम पर कब्जाई जाती हैं धरती पर सबसे ज्यादा जमीनें, जबकि 'पृथ्वी लोक' उसका घर नहीं है। ईश्वर...

रिवाज था उनके यहां कि खाना खाएंपति-पत्नी एक ही थाली में तो उनका रिश्ता कायम रहता है सात जन्म तक।...

-सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' सखि वसंत आया ।भरा हर्ष वन के मन,नवोत्कर्ष छाया ।किसलय-वसना नव-वय-लतिकामिली मधुर प्रिय-उर तरु-पतिका,मधुप-वृंद बंदी--पिक-स्वर नभ सरसाया...

खाकर भरपेट चटखारे ले लेते हैं अदृश्य पकवानों से ही, बच्चों की कल्पना भी बड़ी 'क्षुधा-निवारक' होती है। महंगी गाड़ियों...

अज्ञात हूँ, अनंत में वास हूँ, या चिर प्रकाश हूँ...मैं कौन हूँ...? अंतर्मन की सीमा पर स्थापित इच्छाओं का आकाश...