September 28, 2021

नीचे नैन

अब्दुर्रहीम खानखाना अकबर के वरिष्ठ दरबारियों में से थे। वह अत्यंत उदार हृदय थे। वह स्वयं कवि होने के साथ-साथ अन्य कवियों का सम्मान तो करते ही थे, बल्कि मुक्त हस्त से उनकी सहायता भी करते रहते थे। उनकी दानशीलता और विनम्रता से प्रभावित होकर गंग कवि ने एक बार यह दोहा कहाµ

‘‘सीखे कहाँ नवाब जू, ऐसी दैनी दै न।

ज्यों-ज्यों कर Åँचो कियो, त्यों-त्यों नीचे नैन।।

रहीम ने बड़ी ही सरलता से दोहे में ही यह उत्तर दियाµ

‘‘देनहार कोउ और है देत रहत दिन-रैन।

लोग भरम हम पै करैं, तासौं नीचे नैंन।।’’