September 28, 2021

पीएम के पीएस पीके सिन्हा ने दिया इस्तीफा

पीके सिन्हा ने निजी वजहों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री के प्रधान सलाहकार के पद से इस्तीफा दे दिया है। सिन्हा की गिनती प्रधानमंत्री मोदी के बेहद भरोसेमंद अफसरों में होती है। जब वह कैबिनेट सचिव थे तब उन्हें सेवा विस्तार देने के लिए मोदी सरकार ने 60 साल पुराने नियम को बदल दिया था।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सलाहकार पी. के. सिन्हा ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्याग-पत्र दे दिया है। इसके पूर्व 2019 में नृपेंद्र मिश्र ने प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रटरी पद से इस्तीफा दिया था। उल्लेख्य है कि नृपेंद्र मिश्र के पद-त्याग के बाद ही 2019 श्री सिन्हा को इस पद पर नियुक्त किया गया था। पीएम मोदी के लिए सिन्हा कितने अहम रहे हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अपने पसंदीदा नौकरशाह को अपनी पंसद के पद पर बरकरार रखने के लिए मोदी ने 60 साल पुराने नियम को बदल दिया था।

1977 बैच के यूपी काडर के आईएएस अधिकारी रहे सिन्हा को सितंबर 2019 में प्रधानमंत्री का प्रधान सलाहकार  नियुक्त किया गया था। इससे पहले उन्हें कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) नियुक्त किया गया था। सिन्हा यूपीए सरकार के 10 वर्षों के दौरान कई अहम मंत्रालयों में काम कर चुके थे। 2014 में एनडीए सरकार बनने के बाद पीएम मोदी ने उन पर भरोसा जताते हुए ऊर्जा सचिव के रूप में बरकरार रखा।

ऊर्जा सचिव के रूप में सिन्हा के कामकाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने प्रभावित हुए कि 2015 में उन्हें कैबिनेट सेक्रटरी की जिम्मेदारी दे दी। किसी आईएएस अफसर के लिए यह सबसे वरिष्ठ काडर पद होता है। 2 साल बाद 2017 में जब उनका कार्यकाल खत्म होने वाला था, तो सरकार ने 1-1 साल का दो बार सेवा-विस्तार दिया। कैबिनेट सेक्रटरी के तौर पर उन्हें तीसरी बार 3 महीने का भी एक्सटेंशन दिया गया और इसके लिए सरकार ने 60 साल पुराने नियम को बदल दिया।

दरअसल, अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 के मुताबिक, कैबिनेट सचिव का कुल कार्यकाल 4 साल से ज्यादा नहीं हो सकता था। मोदी सरकार ने उस नियम को ही बदलकर सिन्हा को कैबिनेट सेक्रटरी के तौर पर तीसरी बार 3 महीने का सेवा-विस्तार दे दिया। बदले हुए नियम के मुताबिक सरकार कैबिनेट सचिव को अधिकतम तीन महीने का एक्सटेंशन दे सकती है। इस तरह सिन्हा के नाम सबसे लंबे समय तक कैबिनेट सचिव रहने का रेकॉर्ड दर्ज हो गया। कैबिनेट सचिव रहते हुए उन्होंने जीएसटी कानून के तैयार करने, रघुराम राजन के रिटायरमेंट के बाद आरबीआई गवर्नर के तौर पर उर्जित पटेल की नियुक्ति जैसे फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।