September 28, 2021

ऑनलाइन ठगी : कब टूटेगी पुलिस की नींद

विगत लगभग एक साल से, जब से, कोरोना वायरस और लॉकडाउन का प्रभाव बढ़ा है, मोबाइल पर फ्रेंडशिप, एस्कोर्ट सर्विस और डेटिंग के मैसेजों की बाढ़ सी आ गई है। सभी की भाषा मिलती-जुलती है। अंतर होता है तो सिर्फ इतना कि ऐसे मैसेज अलग-अलग नंबरों आते हैं और उनमें संपर्क के लिए दिया गया नंबर अलग होता है।

मैसेज पढ़कर लगता है, मानो कोई ‘स्वीट सिक्स्टीन’ (षोडशी) आपकी कॉल की प्रतीक्षा में ही बैठी है। संपर्क के लिए एक लिंक या मोबाइल नंबर नीचे दिया रहता है। जैसे ही आप मैसेज में आए लिंक पर क्लिक करेंगे या दिए गए नंबर पर कॉल करेंगे, उधर से एक खनकती हुई सुमधुर आवाज आपके कानों में रस घोल देगी। उसी कर्णप्रिय आवाज में आपसे आपकी बेसिक डिटेल पूछी जाएगी, जैसे नाम, निवास, उम्र, जॉब आदि।

इसके बाद आपसे आपकी प्राथमिकता पूछी जाएगी कि आप किसके साथ फ्रेंडशिप या डेटिंग करना चाहेंगे – कॉलेज गर्ल, हाउसवाइफ, वर्किंग गर्ल, एयर होस्टेस या अन्य कोई। हर श्रेणी के लिए अलग-अलग टैरिफ कार्ड रहता है। आपकी प्राथमिकता पता चलते ही बताया जाएगा कि पहले आप 5000 से लेकर 10000 रुपए ऑनलाइन जमा करवाकर रजिस्ट्रेशन करवाएं, तब अपनी उस ‘चहेती’ से कॉन्टैक्ट कर सकेंगे।

साथ ही विश्वसनीयता के लिए यह पासा भी फेंका जाएगा कि यदि 7 दिन में आप उसकी दोस्ती या डेटिंग से संतुष्ट नहीं हैं तो आपको फ्री में एक और कॉन्टैक्ट नंबर दिया जाएगा।  आपकी ना-नुकर होने पर विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए किसी अन्य लड़की से भी आपकी बात कराई जा सकती है।

अगर आप इस जाल में फंस गए तो पैसे जमा कराते ही उस नंबर पर आपकी कॉल को ब्लॉक कर दिया जाएगा। फिर आप तरसते ही रहिए अपनी उस चहेती से बात करने के लिए। ध्यातव्य है कि ऐसे ठग एक शिकार पर ज्यादा समय नहीं देते। अगर 1 -2 घंटे में आपने पैसे नहीं जमा कराए तो आपको ब्लॉक कर दिया जाएगा। ये ठग प्राय: दिन में 40-50 लोगों से संपर्क करते हैं, जिनमें से 5-7 लोग इनका शिकार बन ही जाते हैं।

इस धोखाधड़ी का दूसरा रूप अपेक्षाकृत थोड़े लंबे समय तक चलता है। इसमें सोशल मीडिया पर दोस्ती करके, कई दिनों तक चैट और कॉल पर आपसे बात होगी, जिसमें मैत्री के नाम पर परिवार, कैरियर आदि की जानकारियों का परस्पर आदान-प्रदान स्वाभाविक है। ‘हाय-हैलो’ से शुरू हुई यह दोस्ती जब सेक्स-चैटिंग तक पहुंच जाती है, तब एक दिन अपने या अपने परिवार के इलाज के नाम पर या किसी इमरजेंसी का हवाला देकर और जल्दी ही लौटा देने के आश्वासन पर आपसे कुछ रुपए मांगे जा सकते हैं।

किसी-न-किसी बहाने से रकम ऐंठने का यह क्रम आगे भी तब तक चलता रह सकता है, जब तक आप उससे रुपए लौटाने की बात नहीं कहेंगे और आपके द्वारा रुपए वापस मांगने का मतलब है दोस्ती की समाप्ति और नंबर ब्लॉकिंग। ऐसी लड़कियां एक समय में लगभग 10 -12 लोगों के साथ धोखाधड़ी करती रहती हैं।

ऑनलाइन धोखाधड़ी का तीसरा रूप एक कदम और आगे है, जिसमें सेक्स-चैटिंग केवल अश्लील शब्दावली तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि वीडियो कॉलिंग के माध्यम से अंग-प्रदर्शन तक पहुंच जाती है। जैसे ही आपने वीडियो कॉलिंग की और कपड़े उतारे, आपकी वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू हो जाएगी।

वीडियो कॉलिंग बंद होते ही आपके पास ‘डिमांड-मैसेज’ आ जाएगा, जिसमें आपसे हजारों रुपयों की मांग की जाएगी। न देने पर वीडियो को यूट्यूब आदि पर अपलोड करने की धमकी भी मिल जाएगी। फिर भी ऑनलाइन भुगतान न करने पर यूट्यूब का कोई कर्मचारी या साइबर पुलिस का कोई अधिकारी बनकर धमकाएगा और मामला सुलझाने के नाम पर रकम बढ़ाकर डिमांड जारी रखेगा।

इस ठगी का चौथा रूप भी है, जिसका संबंध सोशल मीडिया पर विद्यमान विदेशी महिलाओं से है। गोरी चमड़ी वाली ये लड़कियां या महिलाएं भारतीयों को अपने रूप-जाल में फंसाकर कई तरह से धन ऐंठती हैं। इनकी दोस्ती भी ‘हाय-हैलो’ से शुरू होती है, किंतु उसका रुख सेक्सी चैटिंग या सेक्सी वीडियो की ओर नहीं, बल्कि अक्सर ‘गिफ्ट भेजने’ के नाम पर इनडाइरेक्ट ऑनलाइन धन ऐंठने की ओर होता है। इसके लिए पहले वे अपनी आकर्षक मुद्राओं में तरह-तरह की तसवीरें भेजती हैं। फिर अपने जन्मदिन, प्रमोशन आदि के नाम पर आपके लिए रेडीमेड कपड़े, घड़ी, जूते या दूसरे कीमती सामान के साथ-साथ हजारों डॉलर या पांड की नकदी भेजने का बहाना करती हैं। ऐसे गिफ्टों की तसवीर भेजना वे कभी नहीं भूलतीं।

कुछ लड़कियां व्यापार, भारत में इनवेस्टमेंट, अपने भारतीय मित्र से होटल आदि में मिलने के बहाने दाना भी डालती हैं, लेकिन इस सब नाटक का एक मात्र उद्देश्य होता है येनकेन प्रकारेण आपसे अधिकाधिक धन ऐंठना।

गिफ्ट के मामले में प्राय: देखा गया है कि कुरियर कंपनी या कस्टम विभाग के नाम पर आपके पास फोन आता है कि कस्टम क्लियरेंस के लिए अमुक धनराशि भारतीय मुद्रा में ऑनलाइन बताए गए खाते में जमा कीजिए, तब आपके घर के पते पर गिफ्ट का पैकेट पहुंच जाएगा। यदि गलती से आपने एक बार भुगतान कर दिया, तो बाद में अन्य धन की पुन: मांग होगी और यह मांग हमेशा बनी ही रहेगी, जब तक आप ऑनलाइन पेमेंट करते रहेंगे।

व्यापार के मामले में किसी अल्पज्ञात या दुर्लभ चीज की अपनी कंपनी के लिए खरीदारी और उससे होने वाले आशातीत लाभ का लालच दिया जाता है। चीज का नाम और प्राप्ति संपर्क आपकी सहमति के बाद बताया जाता है। पहले उस चीज का नमूना (सैंपल) मांगा जाता है, फिर उसे कंपनी के किसी प्रतिनिधि द्वारा लैबोरेटरी में चैक कराने का नाटक होता। जाहिर है कि यह नमूना भी भारतीय मुद्रा में लाखों का होता है, जिसका भुगतान भी ऑनलाइन ही करना होता है।

यह सैंपल सहज ही ‘पास’ हो जाता है। फिर बल्क में इसका ऑर्डर भी मिल जाता जाता है, लेकिन इसके लिए वादे के मुताबिक कोई एडवांस नहीं मिलता। अब यदि आपको लाखों करोड़ों का व्यापार करना है और रातोरात लखपति या करोड़पति बनना है, तो तथाकथित नमूने वाले एजेंट को अपनी दमपर बल्क माल का ऑनलाइन एडवांस पेमेंट करते रहिए, पर माल की सप्लाई कभी नहीं होगी। स्पष्ट है कि यह नमूने वाला भारतीय ऐजेंट ही होता है।

जहां तक इनवेस्टमेंट के नाम पर विदेशी लड़कियों के भारतीय मित्रों से मिलने के लिए भारत में आने का प्रश्न है, आने से पहले वे फ्लाइट के टिकट और हवाई जाज में बैठने तक की फोटो भेजने से नहीं चूकतीं, ताकि उनके आगमन की विश्वसनीयता बढ़ जाए। ऐसे मामलों में अगले दिन फ्लाइट के भारत पहुंचने के निर्धारित समय के आसपास आपके पास एक फोन आएगा, जिसमें आपको बताया जाएगा कि आपकी तथाकथित मित्र हवाई अड्डे पर पहुंच चुकी हैं, किंतु लिमिट से अधिक धन/सामान लाने के कारण उन्हें हवाई अड्डे पर ही रोक दिया गया है। उनके क्लियरेंस के लिए दंडस्वरूप अमुक धनराशि का अमुक खाते में ऑनलाइन पेमेंट करें। अब यदि आप अपना कमीशन लेना या अपनी तथाकथित मित्र से मिलना चाहते हैं, तो पेमेंट करके राह देखते रहिए।

पुरुषों को फंसाने या उनकी कमजोरी का लाभ अकेली नवयौवना ही उठाती हो, ऐसा नहीं है। यह कार्य पूरी एक टीम करती है। अन्य शब्दों में यह पूरा एक गिरोह है, जो अश्लील वीडियो बनाने से लेकर यूट्यूब आदि पर उसे अपलोड करने, अपेक्षित धनराशि न मिलने पर पुलिस आदि का डर दिखाने तक का कार्य करता है। कई बार तो ये ठग साइबर सेल के अधिकारी बनकर भी धमकाते हैं।

कैसी विडंबना है कि ऑन लाइन ठगी की घटनाएं प्राय: प्रतिदिन होती रहती है, किंतु फिर भी पुलिस और प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंगती। इस संदर्भ में पुलिस का कहना है कि वह तो तभी कोई कदम उठा सकती है जब कोई थाने आदि में अपराध की रिपोर्ट करे। ठीक है, भुक्तभोगी को अपने ठगे जाने की रिपोर्ट करनी चाहिए, किंतु विचारणीय बात यह भी है कि अहमदाबाद में ऐसी ठगी की जो 40 रिपोर्टें हो चुकी हैं, उन पर अब तक पुलिस ने क्या काररवाई की? प्रश्न यह भी है कि यह संख्या 40 तक क्यों और कैसे पहुंची। एक-दो घटनाओं के बाद ही उन पर ब्रेक क्यों नहीं लग गया?

एक बात यह भी विचारणीय है कि क्या कभी पुलिस ने अपने गिरेबान में झांक कर देखा है कि भुक्तभोगी उससे शिकायत करने से क्यों कतराते हैं और चुपचाप अपनी अर्थ-हानि झेल जाते हैं?

कैसे बचें इस धोखाधड़ी से
किसी भी स्थिति में किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर ऑनलाइन भुगतान न करें। किसी भी रूप में अपनी कोई निजी जानकारी साझा न करें। वीडियो चैट करते समय ज्यादा सावधानी बरतें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर आई फ्रेंड रिक्वेस्ट को आंख बंद करके एक्सेप्ट न करें।