September 28, 2021

संभावनाओं के आईने में बजट 2021-22

आज यानी 1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ‘अलग हटके’ बजट पेश करने वाली हैं। चूंकि बजट में अभी कुछ घंटे का विलंब है और पूर्व निर्धारित समय पर ‘शब्द-संचार’ का अंक निकालना है, इसलिए बजट और उसकी समीक्षा बाद में ही संभव है। फिलहाल इस बजट को संभावनाओं के आईने में देखने का प्रयास किया जा रहा है।

यह मोदी सरकार का नौवां बजट होने वाला है और ऐसे समय पेश किया जा रहा है, जब देश कोविड-19 संकट से बाहर निकल रहा है। ऐसे में कोरोना से पार पाने के लिए भारत को वैक्सीन तो मिल गई है, लेकिन क्या आर्थिक संकट से पार पाने के लिए भी कोई ‘वैक्सीन’ मिलेगी? 

इस बजट से उम्मीद की जा रही है कि इसमें महामारी से पीड़ित आम आदमी को राहत दी जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और रक्षा पर अधिक खर्च के माध्यम से आर्थिक सुधार को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। इसके अलावा किसानों को भी बजट में कोई अच्छा तोहफा मिल सकता है।

इस बार के बजट में व्यापक रूप से रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास पर खर्च बढ़ाने, विकास योजनाओं के लिए उदार आवंटन, औसत करदाताओं के हाथों में अधिक पैसा डालने और विदेशी कर को आकर्षित करने के लिए नियमों को आसान किए जाने की उम्मीद की जा रही है।

सीतारमण ने 2019 में अपने पहले बजट में चमड़े के पारंपरिक ब्रीफकेस को बदल दिया था और लाल कपड़े में लिपटे ‘बही-खाते के रूप में बजट दस्तावेजों को पेश किया था। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष का बजट इस तरीके का होगा, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।

विशेषज्ञ चाहते हैं कि यह बजट कुछ इस तरीके का हो, जो भविष्य की राह दिखाए और दुनिया में सबसे तेजी से वृद्धि करती प्रमुख अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाए। सोच-समझकर तैयार किया गया बजट भरोसा बहाल करने में लंबी दौड़ का घोड़ा साबित होता है। इसे सितंबर 2019 में पेश मिनी बजट या 2020 में किस्तों में की गयी सुधार संबंधी घोषणाओं से स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है।

वित्त वर्ष 2021-22 के ऐतिहासिक बजट में सरकार के समक्ष अर्थव्यवस्था को तात्कालिक प्रोत्साहन देने के साथ ही लंबे भविष्य के लिए मजबूती प्रदान करने की चुनौती होगी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इन दोनों की बीच कितना संतुलन बना पाती हैं या नहीं यह देखना महत्वपूर्ण होगा। सरकार का कहना है कि महामारी का सबसे बुरा दौर समाप्त हो चुका है और अर्थव्यवस्था अब पटरी पर आ रही है। 

क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण

संसद में पिछले सप्ताह पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्तमान वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.7 प्रतिशत की गिरावट रहेगी, जबकि अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था तेजी से वापसी करेगी और जीडीपी में 11 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। यदि ऐसा होता है तब भी दो साल में जीडीपी में मात्र 2.4 प्रतिशत की वृद्धि होगी। उल्लेखनीय है कि गत तीन महीनों में अप्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ने के अनंतर वर्तमान वित्त वर्ष राजस्व संग्रह में गिरावट तय है।